may14

शनिवार, 3 अगस्त 2013

हर ईंट जरुरी है …







                                  हर ईंट जरुरी है … 
 

दोस्तों,
एक अच्छी  और मजबूत इमारत कब बनती है ?  जाहिर है जब उसमे एक एक ईंट अच्छे से और मजबूती से लगी हो ! आडी-तिरछी रखी ,कमजोर ,कच्ची ईंटों से हम एक मजबूत और आलीशान building बनने की कल्पना नहीं कर सकते हैं ! अगर हमें गगनचुम्बी ,बुलंद ,आकर्षक और भव्य building बनानी है तो उसकी हर ईंट को अच्छे से और मजबूती से दिवार में  चुनना होगा ! है ना ?

अब एक सवाल आपसे , आपने अभी तक कि अपनी जिंदगी रूपी इमारत की कितनी इंटें   मजबूत और अच्छे से चुनी हैं ?
जाहिर है हम हमारा जीवन बहुत सफल,आकर्षक ,सुखमय ,आनंददायक ,सहज और भव्य बनाना चाहते हैं ! हम दुनिया में जाने ,पहचाने जाना चाहते हैं ! हम यश ,सम्मान ,सफलता की जिंदगी रूपी ईमारत  पाना चाहते हैं !
लेकिन इस ईमारत को बनाने  के लिए आवश्यक ईंटे  हमने इसमें लगाई हैं क्या ,बताइये ?    चलिए उन आवश्यक ईंटों में से कुछ आपको बताता हूँ ! वे ईंटे हैं ---
नियमित दिनचर्या ,अनुशासन ,संकल्प ,नियमितता ,निरंतरता ,सकारात्मक सोच ,सेहतमंद शरीर ,स्वस्थ मन,प्रखर मनोबल ,अदम्य उर्जा ,साहस ,दृढ़ता ,कठिन परिश्रम ,मुस्कुराहट ,मिलनसारिता ,अपनत्व और  ऐसी ही कई असंख्य ईंटे
लेकिन विडम्बना है कि इन मजबूत ईंटो कि जगह हम अधिकतर और बहुतायत में कमजोर और खराब ईंटे अपनी जिंदगी की ईमारत को बनाने में लगा देते हैं ! वे कमजोर और बेकार ईंटे हैं ---
आलस,लापरवाही ,दीर्घसूत्रता ,मक्कारी ,टालमटोल की आदत ,नकारात्मक सोच ,निर्बल-कमजोर शरीर ,लुंज-पुंज व्यक्तित्व ,डर ,लालच ,तनाव,अवसाद ,ईर्ष्या और  ऐसी ही कई असंख्य ईंटे

तो दोस्तों ,खराब ईंटे लगा कर हम एक अच्छी और भव्य ईमारत कि कल्पना कैसे कर सकते हैं ??

हम रोज अपना दिन ऐसे ही बेकार जाया कर देते हैं ,नष्ट कर देते हैं ,कुछ  सार्थक नहीं करते ! फिर बैठ कर सोचते हैं कि जिंदगी में कुछ हासिल ही नहीं हो पा रहा , मैं कुछ बन ही नहीं पा रहा !

दोस्तों अगर सोचने और कल्पना करने मात्र से ही चीजें होने लगतीं ,तो आज ये  धरती ,स्वर्ग से भी सुन्दर और भव्य होती !
 कल्पना करने से भव्य ईमारत और सफल जीवन नहीं बनता ! उसके लिए तो संस्कारों और अच्छी आदतों की ईंटे ,पसीना रूपी पानी ,दृढ संकल्प रूपी सीमेंट और कठिन परिश्रम करने वाले हाथ होने चाहिए !

एक बार अपने जीवन की ईमारत में इनको लगा कर तो देखिये ईमानदारी से !   फिर देखिये आपके जीवन की ईमारत ,  आपका व्यक्तित्व     आकाश की अनंत ऊँचाइयों को  भी छू सकता है !
तो फिर देर किस बात की …………….

डॉ नीरज


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1 टिप्पणी:

  1. मैने पहले भी कहा था आप गागर में सागर भर देते हैं. ईट बढ़िया के साथ साथ मजबूत और ज्यादा देर तक टिकी रहने वाली भी हो यह एक जरूरी चीज है/

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