may14

रविवार, 13 जनवरी 2013

सफलता की सीढ़ी .....


                             




                   सफलता की सीढ़ी .....


 जिंदगी मे हम सभी आगे बढना चाहते हैं ,सफलता की सीढ़ी पर चढ़ कर अपने लक्ष्य तक पहुंचना चाहते हैं !  लेकिन फिर भी कुछ ही व्यक्ति सफलता की पूरी सीढ़ी पर चढ़ कर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाते हैं !  बाकी अधिकतर सीढ़ी के दुसरे या तीसरे पायदान पर ही अटक जाते हैं !  आइये जानते हैं सफलता की सीढ़ी के बारे में---


  • 1.कल्पना --- सीढ़ी का पहला पायदान है ,कल्पना !  हम रोजाना असंख्य कल्पनाये करते हैं ,ख्याली पुलाव पकाते हैं !  अपनी मानसिक शक्ति  का अधिकाँश भाग कोरी कल्पनाओं को करने मे ही खर्च कर देते हैं !  अगर हमे जीवन मे कुछ पाना है   तो सर्वप्रथम उस लक्ष्य की कल्पना अपने मन मे करनी होगी ! क्योंकि जब तक मन रुपी जमीन पर कल्पना रुपी बीज नहीं पड़ेगा तब तक लक्ष्य रुपी पेड़ बनने की प्रक्रिया कैसे शुरू होगी ?

  • 2.तीव्र इच्छा ---  हमारी असंख्य कल्पनाओं मे से कुछ , इच्छाओं मे परिणित होती हैं !  अब ये हम पर है की हम अनेक चीजों (लक्ष्यों ) को एक साथ पाने की थोड़ी थोड़ी इच्छा मे अपनी शक्ति खर्च करें ! या किसी एक लक्ष्य को समग्र रूप से पाने की तीव्र इच्छा मे अपनी पूरी शक्ति खर्च करें !

  • 3.संकल्प --- इच्छा जब बहुत तीव्र हो जाती है तो वह संकल्प मे परिणित हो जाती है !  संकल्प यानी निश्चय !   हम संकल्प तो बहुत करते हैं , नए साल पर , अपने जन्मदिन पर !  लेकिन वो ज्यादा लम्बे समय तक कायम नहीं रह पाते ,है ना ?

  • 4.दृढ संकल्प ---आप कहेंगे संकल्प और दृढ संकल्प मे क्या अंतर है ?  वही जो प्रतिज्ञा और भीष्म प्रतिज्ञा मे है !  जहाँ  द्रढ़ता  आ जाती है वहां स्थिरता भी आ जाती है ! जब संकल्प के साथ आत्म शक्ति और द्रढ़ता  जुड़ जाती है तो वह दृढ संकल्प ,मे  परिणित हो जाती है  !

  • 5. कार्य योजना -- बिना कार्य योजना के दृढ संकल्प सिर्फ एक मानसिक  क्रिया बन कर रह जाता है !  वो यथार्थ मे परिणित नहीं हो पाता !  किसी भी लक्ष्य को जीवन मे पाने के लिए उसकी सही और पूरी कार्य योजना पूर्व मे ही बनानी जरूरी होती हो !  आखिर बिना route chart लिए तो train और plane भी अपना सफ़र शुरु नहीं करते !

  • 6. कठिन परिश्रम ---- सिर्फ सोचने और योजना बनाने मात्र से ही लक्ष्य नहीं पाया जा सकता !  उस हेतु परिश्रम करना पड़ता है , वह भी कठिन परिश्रम ! ढुलमुल तरीके से किया गया परिश्रम व्यर्थ ही जाता है !  route chart लेकर driver गाडी मे ही बेठा रहेगा तो कहीं नहीं जा पायेगा !  लक्ष्य तक जाने के लिए उसे गाडी तो चलानी ही पड़ेगी !

  • 7. एकाग्रता --- जिस तरह अर्जुन को सिर्फ चिड़िया की आँख ही दिखी थी , उसी तरह हमे भी सिर्फ अपना लक्ष्य ही दिखना चाहिये !  एकाग्र होकर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिये !  ड्राईवर भी सड़क पर एकाग्र होकर गाडी नहीं चलाएगा तो लक्ष्य पाना तो दूर दुर्घटना ग्रस्त हो जाएगा ! 

  • 8. प्रबल विश्वास --- यह प्रबल विश्वास ही है जो भयंकर तूफानों मे घिरी कश्ती को सकुशल किनारे पर लगा देता है !  प्रबल विश्वास सर्वप्रथम अपने आप पर ,अपने लक्ष्य को पाने की इच्छा पर और इन सबसे ऊपर उस परम पिता पर , अपने उस आराध्य पर जो आपके जीवन के रथ का सारथी है ! 

  • 9.अडिगता --- लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग मे कई प्रलोभन ,लालच और मृग मरीचिकायें रुपी फिसलनें आएँगी , जो आपको अपने लक्ष्य प्राप्ति की सड़क से फिसला कर असफलता रुपी गन्दगी के दलदल मे गिरा देंगी !  आपको दुर्घटना ग्रस्त कर देंगी !  इसलिए जरूरी है की आप इन सब प्रलोभनों से बचते हुए अडिगता से अपने लक्ष्य की ओर अपना सफ़र जारी रखें ! 

  • 10. स्वास्थ्य--- खराब इंजिन,ख़राब आयल वाली   किसी कार को हम  रेस  मे नहीं  जीता सकते ,उसके लिए कार का फिट होना जरूरी होता है !  उसी तरह अपने किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए यह जरूरी है की आप ना सिर्फ शारीरिक अपितु मानसिक रूप से भी स्वस्थ एवं सबल हों !

last but not least --

  •  नियमितता  ओर निरंतरता -----आखिरी लेकिन सबसे जरूरी बात ! सफलता की सीढ़ी के ये दस पायदान जिन जिन डंडों के सहारे टिके होते हैं , वे हैं --    नियमितता  ओर निरंतरता ! बिना इनके  बाकी सब का कोई मोल नहीं !  नियमित रूप से किये जाने वाले कार्य ही अपना फल देते हैं ! 
अगर बीच के ये सारे पायदान हट भी जाएँ तो भी इन दो नियमितता  ओर निरंतरता के डंडों के सहारे भी व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुँच ही सकता है ! 


         तो आइये ,बढ़ाते हैं अपनी सफलता की सीढ़ी पर पहला कदम...!
                                                                                                            
          डॉ. नीरज .................


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