may14

मंगलवार, 21 मई 2013

article on misconstruction in hindi




समझ का फेर ........


दोस्तों,
 ऐसा कई बार होता है कि आप किसी व्यक्ति से कोई बात कहते हैं , और आप सोचते हैं की मैंने उससे कह दिया है और उसने मेरी बात सुनकर समझ भी  ली है ,ऐसा आपको लगता है ,है ना ?

आप एक boss के रूप में अपने employee को कोई task देते हैं ,समझाते हैं ,और फिर उससे वही result पाने की उम्मीद करते हैं जो आप चाहते हैं ,लेकिन कई बार ऐसा नहीं हो पाता !  आप उनसे चाहते कुछ हैं और वो करते कुछ हैं !  यही बात हम पारिवारिक संबंधों में भी देखते हैं ! माता -पिता बच्चे को समझाते कुछ हैं ,वो समझता कुछ है !  पति पत्नी से कुछ बात किसी और अर्थ में कहता है और पत्नी उसका कोई दूसरा ही अर्थ निकाल लेती है ! (पत्नियाँ नाराज ना हों ,ऐसा ही पतियों के साथ भी है  )

कहने का तात्पर्य   जरुरी नहीं की आप सामने वाले को जो समझा रहे हैं वो उसे ठीक वैसे ही समझे जैसा आप चाह रहे हैं ! सामने वाला इंसान तो अपनी समझ के हिसाब से ही उसे समझेगा !
आप किसी को टयूब -लाइट की दूधिया (सफ़ेद) रौशनी बताना चाहते हैं लेकिन उसने अगर हरा या नीले रंग का चश्मा पहना है तो उसे रौशनी हरी या नीली ही दिखेगी ,आप चाहे फिर कुछ भी कर लीजिये वो तो  वो ही देखेगा और समझेगा जो उसे समझना है !

जब भी किसी को कई जरुरी task दें तो आप cross examine कर यह तसल्ली कर लें की उसने वही समझा है जो आप उसे समझाना चाह रहे हैं ! अन्यथा कुछ ऐसा हो सकता है , जैसा की इस राजा  के साथ हुआ ---

एक बार एक राजा का अपने पडोसी राजा से युद्ध छिड गया ! पडोसी राजा एक छोटे से राज्य का राजा  था ,वो स्वयं अपनी सेना का नेतृत्व कर रहा था !  ये राजा इसका साम्राज्य विशाल था , इसने अपने सेनापति को ही नेतृत्व देकर युद्ध में भेज दिया ! कई दिन युद्ध चला ! एक दिन ये राजा  अपने दरबार में अपने सलाहकारों के साथ किसी गंभीर चर्चा में व्यस्त था , तभी एक सैनिक युद्ध के मैदान से वहां आया और उसने सेनापति का सन्देश राजा को दिया !  उसने कहा --महाराज ! सेनापति जी ने सन्देश भेजा है कि आप युद्ध जीत गए हैं और विरोधी राजा और उसके सिपहसालारों को जीवित बंदी बना लिया गया है ! अब आगे आपके आदेश की प्रतीक्षा है ,आगे उनका क्या करना है ,आदेश दीजिये !
राजा जो की अपने सलाहकारों के साथ किसी अति महत्वपूर्ण बात पर चर्चा में व्यस्त था , उसने उस सैनिक से संक्षेप मे कहा ,सेनापति से कहना की --
अभी उन्हें रोको ,   मत जाने दो !
बाकी मैं इस समस्या से निबट कर सेनापति से आगे की बात करूँगा !

सैनिक आदेश लेकर सेनापति के पास पहुंचा ! सेनापति ने पूछा - इनके लिए महाराज का क्या आदेश है सैनिक ?
सैनिक ने कहा ,महाराज ने कहा है कि --
अभी इन्हें रोको मत ,   जाने दो !
बाकी वो बाद में आपसे बात कर लेंगे ......................

डॉ नीरज ..........

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7 टिप्‍पणियां:

  1. इस कहानी से हमें दो पीठ सीखने को मिले 1 किसी को अपनी बात अच्छे तरीके से समझायो 2॰ किसी की बात अच्छे से समझौ.

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  2. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति आज गुरुवार (२३-०५-२०१३) को "ब्लॉग प्रसारण-४" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

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  3. समझने और समझाने में दोनो ही अपनी समझ के अनुसार काम करते है .......

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  4. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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