may14

बुधवार, 20 मार्च 2013

परोपकारी भी बनें ..




                                  परोपकारी भी बनें ........


एक राजा अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए अकसर वेश बदल कर दिन रात घूमा करता था ! एक दिन वो एक ग्रामीण के वेश में था ,उसने देखा की एक बहुत ही बूढा आदमी एक बाग़ में काजू का पेड़ लगा रहा है ! राजा ने उससे पूछा ,-बाबा ,आप ये पेड़ किसके लिए लगा रहे हो ? जब तक इसमें फल लगेंगे ,तब तक तो आप रहोगे नहीं ! फिर इसे लगाने से क्या फायदा ?
बूढा हंसा ,बोला ,-फलों के पेड़ इसलिए नहीं लगाये जाते की हम लगाते ही उनके फल खाएंगे ,पेड़ लगाता कोई और है ,और उसके फल खाता कोई और है ! यह दुनिया की बहुत पुरानी रीत है ! दुनिया ऐसे ही चलती है ! आज मैं जिस पेड़ के फल खा रहा हूँ उन्हें मेरे पूर्वजों ने लगाया था ,और आज मैं जिस पेड़ को लगा रहा हूँ इसके फल आने वाली पीढियां खाएंगी ! अगर हमारे पूर्वजों ने भी सिर्फ अपने लिए ही सोचा होता तो आज दुनिया और हम इतने विकसित और खुशहाल नहीं होते ! 

नदी अपने लिए नहीं बहती ,पेड़ अपने फल कभी खुद नहीं खाता ,धरती भी किसी बीज को सिर्फ अपने लिए नहीं रखती उसे असंख्य गुना कर हमें ,हमारे जीवन के लिए दे देती है ! बादल भी पानी को अपने तक ही नहीं रखते ,खुले दिल और हाथों से हमारी धरती और हम सबकी खुशहाली के लिए दे देते हैं !

दोस्तों,हम भी थोडा परोपकारी बनें ! किसी भूखे को ज्यादा नहीं तो एक बिस्कुट का पैकिट , फल ,या एक चाय ही पिला दें ! किसी पढने की इच्छा रखने वाले गरीब बच्चे के हाथों में copy-pencil रख कर तो देखिये ! आप भी कोई पेड़ लगाइए ! और कुछ नहीं तो दिल से दुआ ही दीजिये ! अपने कर्म अपने व्यवहार अपने परोपकार से किसी के चेहरे पर एक छोटी मुस्कान ही ला दीजिये ! जितना अच्छाई रूपी परोपकार आप आज इस संसार के लिए करेंगे ,भविष्य में यह संसार और आप भी ,आप की आने वाली पीढियां भी, उतने ही अच्छे से रहेंगी ! 

एक कहावत है --मैंने बरसों पहले किसी के हाथों में एक गुलाब दिया था ,उस गुलाब की खुशबू आजतक मेरे हाथों में बसी है !  

तो दोस्तों ..दे रहे हैं ना आप ?............मुझे ........अपना प्यार ,स्नेह ,और हाँ ......आपके प्यारे comments भी 


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1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (24-03-2013) के चर्चा मंच 1193 पर भी होगी. सूचनार्थ

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