may14

बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

valentine day, kuch pyar bhare sher.......




                         कुछ प्यार भरे शेर .........



दोस्तों ,

valentine day  यानी प्यार का दिन !  वैसे मेरी नजर में हर दिन प्यार का ही है ,अगर महसूस करें तो ,है ना ? प्यार किसी दिन विशेष का मोहताज नहीं है ! आपका हर दिन valentine day हो सकता है !  आज प्यार के दिन पर कुछ शेर ,जो मेरी college time की diary में मैंने बड़े रूमानी अहसास और नजाकत से संग्रहित किये थे ! 

उम्र के सफ़र में एक पड़ाव ऐसा भी आता है जब दुनिया की हर चीज बड़ी अपनी सी लगती  है ! आपकी notebook पढाई के notes से कम और प्यार मोहब्बत के शेरों से ज्यादा भरी होती है ! ऐसे में कुछ harmons का प्रभाव ऐसा होता है की अन्दर सोया शायर कब जग जाता है ,पता ही नहीं पड़ता ! आप या तो खुद शेर लिखने लगते हैं या जहाँ भी कोई अच्छा शेर देखते,सुनते,या पढ़ते हैं उसे अपने शेरों के संग्रह में शामिल करने लगते हैं ! तब हर दिन valentine ही होता है ! 

दोस्तों ये शेर मेरी उस डायरी रूपी सागर की कुछ बूंदें हैं ,जो कभी मैंने रात में जाग जाग कर ,मुशायरे सुन कर ,एक जूनून की तरह इकठ्ठा किये ! और  दूसरे शायरों के शेर अपनी डायरी में लिखते लिखते कब मैं  भी एक शायर बन गया ,पता ही नहीं चला ! अब इसे शेरों का असर कहिये या कुदरत की हसीन शायरी का , जिसने मुझे भी एक शायर बना दिया !

शेर आप सभी तक पहुँचाने के पहले उन सभी शायरों का दिली आभार , जिनके शेर मैंने अपनी diary में लिखे और आप सभी तक उन्हें आज पहुंचा रहा हूँ ! ये शेर ग़ालिब ,मीर ,हसरत जयपुरी ,निदा साहब ,अन्जुम रहबर साहिबा और भी कई नामी शायरों के हैं ,जिन सबके नाम तो मैं नहीं जानता लेकिन दिली आभार के साथ उन सबके शेर आपकी नजर -----------


उनको आता है प्यार पर गुस्सा ,
हमको गुस्से पे प्यार आता है !

फिर भी न सिमटेगी अगर,दोस्त बिखर जाएगी ,
जिंदगी जुल्फ नहीं है जो संवर जाएगी !

यूँ ही तन्हाई में हम दिल को सजा देते हैं ,
नाम लिखते हैं तेरा ,लिख कर मिटा देते हैं ! 
जब भी नाकाम मोहब्बत का कोई जिक्र करे ,
लोग हँसते हैं ,        मेरा नाम बता देते हैं !!

खुदा से क्या मांगूं ,तुम्ही से मांगता हूँ ,
तुम्हीं से क्या मांगूं ,तुम्हीं को मांगता हूँ !

निगाहों में इकरार सारे हुए हैं ,
हम उनके हुए ,वो हमारे हुए हैं !

ये शेर आजकल के आशिकों के लिए  नसीहत के तोर पर --
मरने का तेरे गम में इरादा भी नहीं है ,
है इश्क मगर इतना ज्यादा भी नहीं है !

हया से सर झुक लेना ,अदा से मुस्कुरा देना !
हसीनों को भी कितना सहज है ,बिजली गिरा  देना !

शुक्र ,परदे ही में उस बुत को हया ने रखा !
वरना ईमान गया ही था ,खुदा ने रखा !!

नाजुकी उसके लब की क्या कहिये ,
पंखडी इक गुलाब की सी है !

यूँ जिंदगी गुजार रहा हूँ तेरे बगेर ,
जैसे कोई गुनाह किये जा रहा हूँ मैं !

दिल का क्या हाल कहूँ ,सुबह को जब उस बुत ने !
ले के अंगडाई ,कहा नाज से,      'हम जाते हैं '!!

इधर आँख झपकी ,उधर ढल गई वो !
जवानी भी इक धूप थी ,दोपहर की !!

ख्वाब है तो क्या ,
वो मेरे करीब आये तो !

कोई सवाल जो पूछे ,तो क्या कहूँ उसे !
बिछुड़ने वाले सबब तो बता जुदाई का !!

आपसे सच ना कह सके ,
बस इसका मलाल है !
पर आप भी क्यूँ चुप रहे ,
मेरा खामोश सा सवाल है !!

आईने में वो अपनी अदा  देख रहे थे ,
मर जाए के जी जाए ,कोई उनकी बला  से !

खता साबित करेंगे अपनी ,
और हम खूब छेडेंगे !
सुना है उनको गुस्से से ,
लिपट जाने की आदत है !!

नाज ये है ,कि बड़ा सब्र मोहब्बत में किया !
पूछिए ,सब्र न करते तो भला क्या करते !!

अभी तो दिल में हलकी सी ,
खलिश मालूम होती है !
बहुत मुमकिन है कल इसका ,
मोहब्बत नाम हो जाए !!

मुझसे मत पूछ मेरे दिल की कहानी हमदम ,
इसमें कुछ पर्दानशीनों के भी नाम आते हैं !

                 उफ़ ,वो मरमर से तराशा हुआ सफ्फाक* बदन !    *साफ़ ,उज्जवल 
देखने वाले उसे ताजमहल कहते हैं !!

वो दुश्मनी से देखते हैं ,देखते तो हैं !
मैं शाद * हूँ की हूँ तो किसी की निगाह में !  *खुश 

जालिम कभी तो बाम* पर आजा ,कहाँ तलक ! * छत 
बहलाएगा जी कोई ,दर-ओ-दीवार देख कर !!

पूछा जो उनसे चाँद निकलता है किस तरह ,
जुल्फों को रुख * पे डाल के झटक दिया की यूँ ! *चेहरे 

आपका हमसे रंज ही कैसा ,
मुस्कुरा दीजिये ,सफाई है !

रात भी,नींद भी,कहानी भी,
हाय क्या चीज है जवानी भी !

दिल के आईने में है तस्वीरे यार !
जब जरा गर्दन झुकाई ,देख ली !!

मैं हूँ ,दिल है ,तन्हाई है ,
तुम भी जो होते ,अच्छा होता !!

हुस्न के हाथ बंधे ,वो जरा देर सही ,
मुझ पे अहसां तेरी आई हुई अंगडाई का !

तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक है तुमको ,
मेरी बात और है ,मैंने तो मोहब्बत की है !!

नशीली रात है सारे चराग गुल कर दो ,
ख़ुशी की रात में क्या काम ,जलने वालों का !

जिनके लिए मैं मर गया उनका ये हाल है ,
ईंटें चुरा के ले गए मेरे मजार की .....!

अजब से वो दिन थे ,अजब सी वो रातें ,
तन्हाई में,तन्हाई से,तन्हाई की बातें !

सब कुछ खुदा से मांग लिया ,तुझको मांग कर ,
उठते नहीं हैं हाथ मेरे ,इस दुआ के बाद !

अब इत्र भी मलो तो मोहब्बत की बू नहीं ,
वो दिन हवा हुए  की पसीना गुलाब था !

उनकी हसरत मेरी तकदीर में लिखने वाले ,
काश , उनको मेरी तकदीर में लिखा होता !

क्या बात है की आँखों में सुरमा नहीं है आज ,
खाली धरा हुआ है ,तमंचा चला हुआ !

क्या नजाकत है आरिज * उनके नीले पड़ गए!  * गाल 
मैंने तो बोसा * लिया था ,ख्वाव में तस्वीर का !! *चुम्बन 

जाते हैं खुदा  हाफिज ,बस इतनी गुजारिश है !
हम याद जो आ जाएँ ,मिलने की दुआ करना !!



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1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें
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