may14

गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

कैसा हो जीवन लक्ष्य ?





                       कैसा हो जीवन लक्ष्य ?



दोस्तों ,

हमारा जीवन कैसा होगा ये हमारे निर्धारित किये गए लक्ष्य पर निर्भर करता है !  जैसा हमारा लक्ष्य होगा ,वैसा ही हमारा जीवन होगा ! क्षण -भंगुर लालसाओं को और उनसे मिलने वाली क्षणिक तृप्ति को हम जीवन का लक्ष्य नहीं बना सकते ! अगर हम पानी के बुलबुलों को अपना लक्ष्य बनाएगे  तो जीवन में कुछ हाथ नहीं आएगा ! 

लक्ष्य तो चट्टान की तरह अडिग और मजबूत होने चहिये ! लक्ष्य को पर्वत-शिखर की तरह ऊँचा  और विशाल होना चाहिये ,जिसे परिस्थितियों की आंधी ,धुंध,और तूफ़ान डिगा  न सकें ,जो हमें घनघोर बारिश में भी स्पष्ट रूप से दिखता  रहे !


एक बार एक छोटी सी चिड़िया को आसमान में चमकता एक छोटा बादल  का टुकड़ा दिखा , चिड़िया ने सोचा - चलो में उस बादल  को छु लूँ !  ऐसा सोच बादल  को अपना लक्ष्य बना वो बादल की तरफ उड़ चली , जैसे ही वो बादल  के समीप पहुंची ,बादल  हवा के झोंके से दूसरी  तरफ चला गया , चिड़िया ने फिर उसकी तरफ उड़ान भरी ! लेकिन बादल भी हवा में अठखेलियाँ करता हुआ कभी पूर्व तो कभी पश्चिम में जाने लगा !  वो चिड़िया के साथ आँख-मिचोली खेलने लगा ! तभी हवा का एक झोंका आया और उस बादल को हवा में ही छितरा दिया !  अपनी पूरी कोशिशो के बाद भी चिड़िया उस बादल तक नहीं पहुँच सकी ! उसने सोचा की जिस बादल को पाने के लिए वो अपनी जान लगा कर मेहनत  कर रही थी उसका तो अब अस्तित्व ही नहीं है !

उसे अपनी भूल का अहसास हुआ ,उसे समझ आया की अगर लक्ष्य बनाना ही है तो क्षण-भंगुर बादलो को नहीं ,बल्कि पर्वत की विशाल चोटियों को बनाना चहिये !

हम भी अपने जीवन में छोटे छोटे लक्ष्य बना लेते हैं !  कभी कोई मोबाइल ,कोई bike  ,कोई कार पाना ,या किसी क्लास में पास होना ही हमारा लक्ष्य बन जाता है ! ठीक है ,लेकिन उसके बाद ??  मोबाइल या कार खरीद कर फिर ?  फिर हम और महंगे मोबाइल या और अच्छे ब्रांड के मोबाइल या कार को अपना अगला लक्ष्य बना लेते हैं !और ये सिलसिला ऐसे ही जीवन पर्यन्त चलता रहता है !

अंत में हमें लगता है की जहाँ हम एक लम्बी छलांग लगा सकते थे ,वहीँ  हमने पूरी जिंदगी छोटे छोटे कदम चल कर ही निकाल दी ! है ना ?
दोस्तों लक्ष्य हमेशा बड़ा बनाइये ,फिर चाहे उसे छोटे छोटे हिस्सों में बाँट लीजिये ! उससे उसे पाने में सुविधा रहेगी !

लक्ष्य को बनाने के पहले हमें ये पता होना चहिये की क्या है हमारे जीवन का लक्ष्य? और जब एक बार ये पता लग जाये तब हमें फिर ये प्रयास करना चहिये की कैसे हासिल करें अपने जीवन का लक्ष्य !



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