may14

शुक्रवार, 26 अक्तूबर 2012

your health your choice in hindi





मन से करें या बेमन से ,करना तो पड़ेगा ही .....


दोस्तों ,

एक सवाल आपसे ?  आप किसी को रोज 10 रुपये ख़ुशी से देना पसंद करेंगे या किसी दिन कोई आपसे जबरदस्ती 10,000 रुपये ले जाए ! कोनसी  परिस्थिति आप चाहेंगे की आप के साथ हो ?

जाहिर है , आप सभी ख़ुशी से रोज 10 रुपये देना ज्यादा पसंद करेंगे !  है ना ?

तो फिर आप क्यों  नहीं ख़ुशी से रोज 10 मिनट अपने शरीर ,अपनी सेहत के लिए देते ! रोज के 10 मिनट का किया गया ये निवेश आपको स्वस्थ और सेहतमंद रखेगा !

अब आप कहेंगे की 10 मिनट तो हम जरूर दे देंगे  पर हमारे पास इतना काम का बोझ है की हमें 10 मिनट भी हमारे अपने लिए समय नहीं है !

            दोस्तों , ये तो वही  बात हुई की आप अपनी गाडी चलाने  में इतने व्यस्त हैं  की  आपको पेट्रोल भरवाने का भी समय नहीं है ! इसका परिणाम आप जानते ही हैं !  कभी अचानक कहीं रास्ते में आपकी गाडी का पेट्रोल ख़तम हो जाएगा और आपको परेशान हो कर अपनी गाडी को खींच कर पेट्रोल पम्प तक लाना पड़ेगा और पेट्रोल भरवाना पड़ेगा ! है ना ?

तो क्यों ना ,आप पेट्रोल ख़तम होने के पहले ही टेंक full करवा लेते ?

दूसरी बात ,अगर हम रोज अपने शरीर पर ध्यान नहीं देंगे ,उसकी देखभाल नहीं करेंगे तो वह कमजोर होगा ,बीमार होगा ,आपको इशारे देगा की थोडा मुझ पर भी ध्यान दे लो भाई !
लेकिन फिर भी अगर काम की अधिकता ,आलस और लापरवाही की वजह से आप उसके लक्षणों की उपेक्षा करेंगे, तो थक हार कर वो हथियार डाल  देगा !

         आप किसी कमजोर ,थके घोड़े को चाबुक मार कर ज्यादा देर नहीं चला सकते ! एक समय बाद वो सड़क पर ही बैठ जाएगा ,फिर आप चाहे कितना भी चाबुक मारें वो हिलेगा भी नहीं !

उसी तरह शरीर का ध्यान नहीं रखने पर एक समय बाद वो कमजोर हो जाएगा ,बीमार पड़ जाएगा ! तब फिर आपको मजबूरी में hospital भी जाना पड़ेगा ,डॉक्टर  को फीस भी देनी पड़ेगी ,दवा भी खानी पड़ेगी और सारे जरुरी काम छोड़ कर total rest भी करना पड़ेगा ,खर्चा होगा वो अलग ! येही है जबरदस्ती किसी का आपसे 10,000 रुपये लेना !

बीमार होकर भी जब हमें शरीर का ध्यान रखना ही है ,तो क्यों न सेहतमंद रहते हुए ख़ुशी से केवल 10 मिनट रोज देकर अपने शरीर और सेहत का ध्यान रखें !

 मन से करें  या बेमन से ,करना तो पड़ेगा ही ....आखिर सेहत का सवाल है ! है ना ?

    ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

2 टिप्‍पणियां:

  1. एक सूझ-बूझ से भरा प्रेरक लेख |शरीर ही माध्यम है समस्त कर्मों का ,बिना कर्मों के जीवन शून्य हुआ करता है |तो क्यों न स्वस्थ रहकर समाज.राष्ट्र एवं इस संसार में अपने होने के उद्देश्य को पूरा करें |सच ही तो कहा गया है "जान है तो जहान है |"
    आभार
    रजनी सडाना

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. शुक्रिया रजनी जी,
      आपके motivative comments का सदा ही इन्तजार रहता है !

      हटाएं

दोस्त, आपके अमूल्य comment के लिए आपका शुक्रिया ,आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है !